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शनि रत्न नीलम



नीलम शनि का रत्न है | इसे शनि के शुभ्फालो में वृधि तथा अशुभफालो में कमी के लिए धारण किया जाता है | यदि जन्मपत्रिका में शनि शुभ भावेश होकर शुभ स्तिथि में है, तो उनके शुभ फलों में वृधि के लिए नीलम रत्न धारण करना चाहिए | यदि जन्मपत्रिका में शनि नीच राशी या नवांश में स्तिथ होकर निर्बल स्तिथि में है, तो उसकी निर्बलता को दूर करने के लिए शनि रतन धारण करना चाहिए | 
इसी प्रकार यदि वह अस्तंगत है अथवा वक्री है या बाल्य अवस्था वृधावस्था में है, तो उसके शुभफलो में वृधि के लिए भी नीलम रत्न को धारण करना चाहीए |
           मकर एवं कुम्भ राशी वाले व्यक्तियों के लिए शनि रत्न नीलम धारण करना चाहिए |
           ज्योतिष विद्वानों की मनियता है की यदि शनि की महादशा के प्रभाव में है, तो उस महादशा अवधी के दौरान शनि रत्न नीलम धारण करने से महादशा जनित शुभफालो में वृधि होती है तथा अशुभफालो में कमी आती है | इसी प्रकार यदि शनि गोचर में अशुभ है, अथवा साडेसाती या ढाईया का प्रभाव है तो शनि रतन नीलम धारण करने से रहत मिलती है | इस सम्भन्ध में ज्योतिष से सलाह लेना आवश्यक है|
           आधुनिक ज्यौतिष के अनुसार जिन व्यसायो का प्रतिनिधित्व शनि करता है, उन व्यसायो में संलग्न व्यक्तियों को भी शुभ्फालो की प्राप्ति के लिए शनि रत्न धारण करना चाहिए| इसी प्रकार आप शनि जनित रोगों से आप पीड़ित है, तो उस परिस्थिति में भी शनि रत्न नीलम धारण करने से अनुकूलता आती है | व्यवसायों एवं रोगों के निवारण आदि के लिए नीलम रत्न धारण करते समय ज्योतिष की सलाह लेना आवयशक है |

           अंगूठी या लॉकेट : नीलम को अंगूठी या लॉकेट किसी में भी धारण किया, यह ध्यान रखे की दोनों ही  स्थिथि में यह शरीर को स्पर्श करता हुआ होना चाहिए |
       
           धातु : नीलम को लोहे अथवा पंचधातु की अंगूठी या लॉकेट में जुडवाना चाहिए, इसके अलावा चांदी या वाइट मेटल भी इसके लिए उपयुक्त है |
       
           अंगुली : नीलम को दाहिने हाथ की मध्यमा अंगुली में धारण करना चाहिए , स्त्री एवं पुरुष दोनों ही इसे दाहिने हाथ की मध्यमा अंगुली में धारण कर सकते हैं |

            आवयशक सामग्री : कच्चा दूध, पिसी हल्दी, रोली या घिसा हुआ लाल चन्दन, अक्षत(साबुत चावल), काले तिल, सुगन्धित पुष्प, दीपक, गाय का घी, घूप या अगरबत्ती, प्रसाद, दक्षिणा के लिए नकदी, जल का लोटा, दो थाली या प्लेट, एक कटोरी|

            प्रयोग विधि : नीचे दिए गये महूरत के दिन नाहा कर एक कटोरी में कच्चा दूध और उसमे थोड़ी सी पिसी हल्दी एवं थोड़ी शक्कर मिलाएँ, उसमे अंगूठी या लॉकेट को 10-15 मिनिट के लिए रख दें, फिर उसके बाद उसे शुद्ध जल से स्नान करवाएं तथा एक प्लेट को शुद्ध करके उस पे पुप्ष एवं चावल की ढेरी, बनाकर उसके ऊपर शनि रत्न नीलम की अंगूठी या लॉकेट रख कर पूजा स्थान पर पूजा शुरू करें | सबसे पहले एक पुष्प लेकर लोटे में रखे हुए, जल में उसे भिगोकर आपने ऊपर छिड़क कर शुद्धिकरण करें, अब दीपक को प्रज्वलित कर लें तथा धूप अगरबत्ती भी जला लें |
           इसके बाद एल थाली में रोली, अक्षत(चावल), पुप्ष, प्रसाद, आदि लगा लें, थोड़ी-सी रोली को जल डालकर भिगो लें, उस भीगी हुई रोली से अंगूठी या लॉकेट पर तिलक करें, उसके ऊपर अक्षत और काले तिल लगायें फिर पुप्ष अर्पित करें और दीपक एवं धूप दिखाए, अंत में प्रसाद चढ़ाएं तथा दक्षिणा आर्पित करें| इसी प्रकार का पूजन करते समय "ॐ शं शनैश्चरायै नम:" मंत्र का उचारण करें|
            इस प्रकार पूजन करने के बाद पश्चिम दिशा की ओर देअखते हुए इस लॉकेट या अंगूठी को निम्न्लिखित मंत्र का उच्चारण करते हुए अथवा पूर्वोक्त उंगली में धारण कर लेना चाहिए|

       ॐ शं शनैश्चरायै नम:||

        अन्य दिनों में : धारण करने के बाद अन्य दिनों में स्नान करने के बाद 'ॐ शं शनैश्चरायै नम:' मंत्र का यथा संभव जाप करना चाहिए |


आवश्यक साव्धानियाँ
1. अंगूठी एवं लॉकेट की पवित्रा का पूरा पूरा ध्यान रखें |
2. इसे सदेव पहने रखना होता है, अगर आपको कही लगता है की इसकी शुद्धता कही जाने से ख़राब हो रही है, जैसे किसी शवयात्रा में जाए तो इसे उतार कर जाएँ, फिर वापस यथा उचित विधि से शुद्ध होकर दुबारा धारण करें|
3. शनि रत्न नीलम को धारण करने के बाद खाने पीने का कोई परेहज नहीं है |
4. इसे पूर्ण श्रधा एवं विश्वाश के साथ धारण करें, इसका असर कई लोगो को जल्दी हो जाता है, कई लोगो को समय लगता है, तो धर्य रखे, विश्वाश रखे|
5. महिलाएँ भी इस रत्न को धारण कर सकती हैं,ऐसी कोई रोक टोक नहीं है|
6. सूर्य रत्न, चन्द्र रत्न, तथा मंगल रत्न, के साथ इसे धारण नहीं करना चाहिए|
7.  कोई भी रत्न पहनने से पूर्व ज्योतिष की सलाह लेना ज़रूरी है||

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